हर बार जब छिड़ती है जंग तो यु लगता है,घडी आ गयी है अंतिम फैसले की ।पर हर बार वो हारा है,पस्त होकर हौसलों से मेरे ।गिराया जरूर उसने कई बारकोशिश भी की मुझे तोड़ने की ।पर उठ गया मै हर बारथाम कर खुद अपना हाथ ।हर चोट जो दी उसने,दे गयी सबक मुझे उसेContinue reading “अपना हाथ थामे”
Author Archives: Vasant V. Bang
रुकना कहा है
जब आगे बढ़ने लगो,तो पूछो अपने आप से।ये नहीं की मंज़िल क्या है,बल्कि ये की रुकना कहा है।मंज़िले होती है छलावे की तरह,दिखाई देती है पर हासिल नहीं होती।वरना हम बस चढ़ते चले जाते है,आसमान को छूने की जुस्तजू में।जब लगता है बस एक उंगली भर बाकी है,अक्सर उठ जाया करते है बवंडर।और उडा लेContinue reading “रुकना कहा है”
पहिली सी ‘हि’ मोहब्बत
तुझसे पहली सी मोहब्बत ही तो है, मायूस न हो मेरे महबूब। थोड़ा सा वक्त ही तो गुजरा है, चहरे का बस नूर ही तो बदला है। पर आज भी वही है तेरे नाम की हिना, बस हाथो से बालो में उतर आयी है। आज भी हर बार जब दिल धड़कता है, सास तो तेरेContinue reading “पहिली सी ‘हि’ मोहब्बत”
खाएं या न खाएं
एक होड़ लगी थी की कौन कितना खा सकता है,असल में मायने ये रखता था की कौन कितना पचा सकता है।सबकी देखा देखी मै भी हो गया इस होड़ में शामिल,ये समझे बिना की मन की चाहत पर तन कैसे करे तामिल।मन की भूख के दम पर मै खाये जा रहा था,मुझे देखकर मेरे चेलेContinue reading “खाएं या न खाएं”
पन्ने और किताब
मत बनो महज एक पन्ना, बनना ही है कुछ तो पूरी किताब बनो । पन्नो का कोई वजूद नहीं होता, सिर्फ एक कागज और थोड़ी सी स्याही। हा नजर वो जरूर पहले आते है, किताबो को बनने में समय जो लगता है। पन्ने मोहताज होते है हवाओ के रुख के लोग ये अक्सर भूल जातेContinue reading “पन्ने और किताब”
कल और आज
कल जब मै निकल पड़ता थातलाश में अनजानी ख्वाहिशो केमुस्कुरा देता था दीदार ऐ चाँद परमायूस भी हो जाता उसके न निकलने परफिर संभाल लेता अपने आप कोसोच कर की समय ही तो हैरुकेगा थोड़े, फिर कल रात होगीपहेलियों को बनाता और बुझातामै चलता रहा हाथ थामे समय काआज थकने लगे है पैर मेरेपर दिलContinue reading “कल और आज”
यार बस मै और तुम
बहोत कुछ होता है हर किसी का हर किसी के साथ,बीवी, बच्चे, भाई, बहन और माँ बाप के साथ,पर होता है जिंदगी का कुछ हिस्सा ऐसा भी ,जिसको बाटा होता है बस कुछ खास दोस्तों के साथ।बनते बनते कभी बेटा, तो कभी बाप, तो कभी पति,भूल जाते है हम अपने आप ही को।हर किसी कोContinue reading “यार बस मै और तुम”
तू खुदा है भी या नही?
विश्वास कर लेता हू ये सोचकर,कभी तो तू इंसाफ करेगा.पर माफ नही कर पाऊंगा,भरोसा जब कभी ये टूटेगा.हर दर्द को सह जाता हू ये सोचकरकि शायद सजा होगी किन्ही अनदेखे गुनाहों कीपर तभी सवाल कौंध जाता है मेरे मन मे,उनका क्या जो सरेआम गुनाह किये जाते है.सोचता होगा तू शायद कि क्या हि कर लूंगाContinue reading “तू खुदा है भी या नही?”
क्या महसूस करना है?
सुनकर बलात्कार की वारदातों को,कभी जन आक्रोश उमड़ पड़ता था ।क्या वो अनपढ़ो का सैलाब थाजो न पूछता था बलात्कारी का जाती और धर्म।आज हर कोई ज्ञान से भरा है लबालब,व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के इस दौर में।नाम सुन कर तय करने लगे है,कुछ बोले भी या न बोले ।आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के इस दौर मेंलिखना बोलना तोContinue reading “क्या महसूस करना है?”
दुतरफा कल
जो तू हार जाए कभी तो रो लेना,महसूस भी करना दर्द को।पर न टूटने देना हौसलो को,घोल कर पी जाना शराब समझ कर।जब पहुंचेगा दर्द रग रग में,लाएगा उबाल लहू में तेरे।मिला देगा खाक में उन सभी को,जिन्होने हराया था तुझे कभी।आज के नशे में धुत वो भूल चुके होंगे,कल तो दुतरफा है, एक पीछेContinue reading “दुतरफा कल”