
तुझसे पहली सी मोहब्बत ही तो है,
मायूस न हो मेरे महबूब।
थोड़ा सा वक्त ही तो गुजरा है,
चहरे का बस नूर ही तो बदला है।
पर आज भी वही है तेरे नाम की हिना,
बस हाथो से बालो में उतर आयी है।
आज भी हर बार जब दिल धड़कता है,
सास तो तेरे नाम की ही लेता है।
डोरे जरूर डाले कई चेहरों ने
रूबरू भी हुआ शान ओ शौकत से ।
पर रूह से जिस तरह बांधा तूने,
तो कैसे कह देता ‘मुझसे पहली सी मोहब्बत न मांग’।