
हर बार जब छिड़ती है जंग तो यु लगता है,
घडी आ गयी है अंतिम फैसले की ।
पर हर बार वो हारा है,
पस्त होकर हौसलों से मेरे ।
गिराया जरूर उसने कई बार
कोशिश भी की मुझे तोड़ने की ।
पर उठ गया मै हर बार
थाम कर खुद अपना हाथ ।
हर चोट जो दी उसने,
दे गयी सबक मुझे उसे हराने की ।
दाद तो मै उसे भी देता हु,
लौट जो आता है बार बार।