गुब्बारा

हर आदमी है केवल एक गुब्बारा, जो जब दिखे ऊँचा लगे सबको प्यारा। गुब्बारे की ऊंचाई नापना गलत नहीं, पर गुब्बारे में हवा किसने भरी उससे लगता है अंदाज़ सही। उधार के फेफड़े गुब्बारो को जल्दी ज़रूर उड़ाते है, पर सूद ना चुकाने पर उतनी ही तेज़ी से ज़मीं पर भी लाते है। पर फेफड़ोContinue reading “गुब्बारा”

चमकना या चमकाना ?

चका चौंध सबकी होती है, सवाल सिर्फ होता है: कैसे और कब।  कोई चमकाता  है बाप के नाम और दाम से, कोई चमकता है खुद के काम से।  जब कुछ इतराते फिरते थे पुश्तैनी दम पर, तक़दीर बनाने का जिम्मा था खुद हम पर।  किसी रोज हमारी साईकिल को एक मोटरबाइक ने क्या हरा दिया,Continue reading “चमकना या चमकाना ?”

अव्यक्त

उनके जाने की खबर सुन कर दिल का कांप जाना, और ऊनको सामने पाते ही सांसो का तेज तेज चलना। उँगलियों का थरथराना और होंठो का कंपकपाना, जुबा का लड़खड़ाना, और शब्दों को भूल जाना। क्या यह किसी बात का अंदेशा है, कोई कहता है यह हमारे दिल का छुप्पा संदेसा है. पर आप हैContinue reading “अव्यक्त”