उससे मुझे मुहब्बत हो जाये इसलिए, उसने मुझे अपने आप से नफरत करना सिखलाया। अरे कितना छोटा है तू बोला वो मुझसे, आ मेरे पास, तेरा कद मै खिंच दूंगा।
खुश होकर मै जैसे ही उसके पास पहुंचा, उसने धर दिए अपने पैर मेरे सर पर। उंचाई पर पहुंचते ही फिर शुरू की उसने नयी खोज, उनकी जो तैयार हो खुद को छोटा समझने के लिए।
कई बार रिश्वत देकर देखी आईने को, हर बार सिर्फ नाकामी ही नज़र आयी। ऐसा भी क्या मांगा मैने, कुछ दाग ही तो छुपाने की मिन्नत की थी।
अरे आईने कुछ सिख मेरी माँ से, कितने जख्म छुपाती है मुझसे। कभी नहीं कहती मै मिलने नहीं आया, ज़माने को मेरी व्यस्तता की दुहाई जो देती है।
बहन भी नाज करती है मुझ पर, मेरी हरकतों को पिताजी से छुपाती है। राखी की लाज मै रखु या ना रखु सबसे अच्छा भाई बताती है मुझे।
अरे आईने तुझसे तो अच्छी है मेरी पत्नी, बिना मुख़ौटे कभी बाहर निकलने नहीं देती। छुपा देती है मेरे अंदर के रावण को, श्रृंगार ही वो कुछ ऐसा करती है।
उसके पिता जैसा कोई नहीं ये कहकर मेरी बेटी इतराती है। भूल जाती है वो हर उस फरक को, जो मैंने उसमे और उसके भाई में किया।
अरे आईने हर बार सोचकर तेरे सामने खड़ा हो जाता हु, की शायद कभी तो तस्वीर बदल देगा। पर तू है की हर बार मुझे मुझसे मीला देता है, क्या करू बता? बदल दू अपने आप को या तोड़ दू तुझे?
जब से मेरे मरने का पता चला था, मेरे घर आने वालो का ताता लगा था। कोई रो रहा था, कुछ कोशिश कर रहे थे , परन्तु चिंता के भाव सबके मुँह पर झलक रहे थे।
चिंता नहीं थी किसी को मेरे परिवार की , चिंता तो थी मेरे अंतिम संस्कार की। लाश को जलाये या दफनाए विषय गहन था, मै हिन्दू हु या मुस्लिम इस पर चल रहा मंथन था।
तभी एक आवाज़ आयी, आज दंगे रहने दो भाई। शमशान और कब्रिस्तान में आज जगह नहीं है , एक ही लाश आज के लिए सही है।
सभी धरमो के रक्षको ने बड़ी मुश्किल से भावनाओ पर काबू किया, लाश को आधा जलाने और आधा दफ़नाने का फैसला किया। इतनी जद्दो जहद के बाद जब ऊपर पहुंचा, किसे क्या रिश्वत दू ये सवाल मन में कोहन्दा।
सोचा मिले येशु तो बताऊंगा कितनो को मैंने क्रिश्चन बनाया, भगवान को तो बता दूंगा कितनो को घर वापस लाया। खुदा को जिहाद का वास्ता दूंगा, नानक, बुद्ध , महावीर को भी किसी तरह खुश कर लूंगा।
पर ऊपर के हालत देखकर मेरा सर चकराया , ईश्वर, अल्लाह, येशु की जगह मुझे एक बहुरुपिया नज़र आया, इनके पास रहने अलग अलग घर नहीं सोचकर मुझे तरस आया, आखिर इनके हालत बदलने का मैंने बीड़ा उठाया।
मैंने निचे धर्म रक्षको को फ़ोन लगाया, उपरवालो के हालात का जायजा करवाया। अब निचे इंसानो की मीटिंगे चल रही है , ऊपर वालो के हालात सुधारने की योजनाए बन रही है।
सेठो ने कहा है उपरवालो के लिए धन के भंडार खोल देंगे, जरुरत पड़ने पर कस्टम, एक्साइज इनकम टैक्स वालो की भी मदत लेंगे। नया घर बनाने के लिए तोड़फोड़ का जिम्मा युवा लेंगे, उपरवालो पर हो रहे अन्याय का व्हट्सप्प पर प्रचार भी करेंगे।
उपरवालो को मैंने समझाया , अब तुम आश्वस्त हो जाओ, बहुरुपियापन छोड़ अलग अलग रूप में आ जाओ। साक्षात् इंसान जो अब तुम्हारी मदत करेंगे , जल्द ही आप सब अलग अलग घरो में रहेंगे।
आपके घरो पर अब इंसान पहरा देंगे, आपकी भावनाओ की जिम्मेदारी हम लेंगे। इस पुण्य कर्म के लिए मै फिर निचे जाऊंगा, भड़का कर दंगे और कईओ को अपने साथ ऊपर ले आऊंगा।