
सोचकर ये कि कल महफूस रहे उसकी पुश्ते,
आज दांव पर लगा दी उसने किसी और की।
बस भी करो, जंग का इल्जाम न दो राजा को,
मरने वालो को शहीद भी तो वो कहता है।
छुपाने के लिए दर्द हर एक बेवा का,
समाज से फक्र का चोला भी तो वो दिलवाता है।
जिनके सर से छीन गया हो बाप का साया,
उनके फुले हुए सिनो की दाद भी तो वो देता है।
इस फक्र को पाने की वो कभी इच्छा नहीं जताता,
खुदके बच्चो को वो सिपाही तक नहीं बनाता।
बहोत बड़ा दिल होता है राजा का,
हमेशा बाट देता है शहादत का मौका औरो को।








