मत बनो महज एक पन्ना, बनना ही है कुछ तो पूरी किताब बनो । पन्नो का कोई वजूद नहीं होता, सिर्फ एक कागज और थोड़ी सी स्याही। हा नजर वो जरूर पहले आते है, किताबो को बनने में समय जो लगता है। पन्ने मोहताज होते है हवाओ के रुख के लोग ये अक्सर भूल जातेContinue reading “पन्ने और किताब”
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कल और आज
कल जब मै निकल पड़ता थातलाश में अनजानी ख्वाहिशो केमुस्कुरा देता था दीदार ऐ चाँद परमायूस भी हो जाता उसके न निकलने परफिर संभाल लेता अपने आप कोसोच कर की समय ही तो हैरुकेगा थोड़े, फिर कल रात होगीपहेलियों को बनाता और बुझातामै चलता रहा हाथ थामे समय काआज थकने लगे है पैर मेरेपर दिलContinue reading “कल और आज”
यार बस मै और तुम
बहोत कुछ होता है हर किसी का हर किसी के साथ,बीवी, बच्चे, भाई, बहन और माँ बाप के साथ,पर होता है जिंदगी का कुछ हिस्सा ऐसा भी ,जिसको बाटा होता है बस कुछ खास दोस्तों के साथ।बनते बनते कभी बेटा, तो कभी बाप, तो कभी पति,भूल जाते है हम अपने आप ही को।हर किसी कोContinue reading “यार बस मै और तुम”
तू खुदा है भी या नही?
विश्वास कर लेता हू ये सोचकर,कभी तो तू इंसाफ करेगा.पर माफ नही कर पाऊंगा,भरोसा जब कभी ये टूटेगा.हर दर्द को सह जाता हू ये सोचकरकि शायद सजा होगी किन्ही अनदेखे गुनाहों कीपर तभी सवाल कौंध जाता है मेरे मन मे,उनका क्या जो सरेआम गुनाह किये जाते है.सोचता होगा तू शायद कि क्या हि कर लूंगाContinue reading “तू खुदा है भी या नही?”
क्या महसूस करना है?
सुनकर बलात्कार की वारदातों को,कभी जन आक्रोश उमड़ पड़ता था ।क्या वो अनपढ़ो का सैलाब थाजो न पूछता था बलात्कारी का जाती और धर्म।आज हर कोई ज्ञान से भरा है लबालब,व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के इस दौर में।नाम सुन कर तय करने लगे है,कुछ बोले भी या न बोले ।आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के इस दौर मेंलिखना बोलना तोContinue reading “क्या महसूस करना है?”
दुतरफा कल
जो तू हार जाए कभी तो रो लेना,महसूस भी करना दर्द को।पर न टूटने देना हौसलो को,घोल कर पी जाना शराब समझ कर।जब पहुंचेगा दर्द रग रग में,लाएगा उबाल लहू में तेरे।मिला देगा खाक में उन सभी को,जिन्होने हराया था तुझे कभी।आज के नशे में धुत वो भूल चुके होंगे,कल तो दुतरफा है, एक पीछेContinue reading “दुतरफा कल”
तजुर्बो की थकान
कभी न खत्म होनेवाले इम्तेहानों से थककरएक दिन भाग जाना चाहता था वो रण छोड़कर।तभी दस्तक दी जिंदगी ने जिम्मेदारियों की गठड़ी लिये,जगाकर अपराध के बोध को ला खड़ा कर दिया फिर रेस में।शायद शक था जिंदगी को उसके जिम्मेदार होने पर,इसीलिए वास्ता दे दिया हर इम्तेहान से मिले तजुर्बो का।हिम्मत जुटाकर उसने भी एकContinue reading “तजुर्बो की थकान”
नास्तिक या आस्तिक ?
मै जो नास्तिक बन जाऊ तो इल्जाम तेरे सर होंगा,फरियाद पर फरियाद, और तू है कि दर्द कम ही नहीं करता ।नाक़बुली के लिए तू गिना सकता है खामियां मेरी,पर न जो होती खामियां तो क्या मै खुद खुदा नहीं होता? एक जद्दोजहद सी है मेरी आस्था और तेरी बेरुखी में,देखते है कौन टूटता हैContinue reading “नास्तिक या आस्तिक ?”
रूह का प्यार
जो छूने को बेताब हो वो रूह का प्यार नहीं,वो तो बस एक एहसास है किसी के खास होने का।जो बसा लेते है किसी को अपने दिल में,बाहर नहीं, उनकी दुनिया होती है खुद अपने भीतर।वो मोहताज नहीं होते आँखों से देखने के लिए,न ही जरुरी आवाज का उनकी कानो में पड़ना।बस उसका होना हीContinue reading “रूह का प्यार”
दिल और दिमाग
किसी को इम्तिहानो से गुजरते देख,लोग सोचते है बहोत तेज है ये।कौन कहता है हर इम्तिहान मजबूत बनाती हैटूटने का दर्द देखकर भला कही महसूस होता है?आसान नहीं होता दिल और दिमाग दोनों का बोझ ढोना,उतार कर फेंका भी तो नहीं जाता किसी एक को।खुदा का करम मानते है इन दोनों के होने को,पर कइयोंContinue reading “दिल और दिमाग”