कुरेदने को यहाँ एक नहीं हज़ार मिलेंगे जख्म,हर जख्म का अलग अंदाज-ए -बयां होगा।किसी और के लहू से अगर जो भर जाते जख्म,वो क्यों आज तक अपने दिलो में नासूर लिए घूमते।
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इंतजार
उम्र की शाम हो चली है हिचकियो के इंतजार में,शायद अब वो कांधा देने ही आएगी जनाजे को मेरे।या खुदा बस अब और एक बार मत तोड़ना मेरा दिल,या फिर मयखाना बना देना एक कब्रिस्तान में भी।
राजा का दिल
सोचकर ये कि कल महफूस रहे उसकी पुश्ते,आज दांव पर लगा दी उसने किसी और की।बस भी करो, जंग का इल्जाम न दो राजा को,मरने वालो को शहीद भी तो वो कहता है।छुपाने के लिए दर्द हर एक बेवा का,समाज से फक्र का चोला भी तो वो दिलवाता है।जिनके सर से छीन गया हो बापContinue reading “राजा का दिल”
गरीब अमिर
हर शख्स सोचता है कि क्या था वो किसी की किताब में कही?हालांकि खुद उसकी किताब में कुछ नाम रहे होंगे जरूर।जिंदगी खड़े कर देती है ये सवाल उस वक्त,जब उसकी किताब के बचे होते है सिर्फ चंद पन्ने।ऐसा नहीं की हर किसी की किताब खाली ही रही हो,न होती है कमी पन्नो की हरContinue reading “गरीब अमिर “
एलान- ऐ -जंग
बरसो बाद ये खबर आयी कि वो पीछे छूट गया, तब कही अहसास हुआ उससे जुदा होने का। एक कारवां जो साथ चलता था हर वक्त, शायद उसकी सिसकियों को दबा देता था । अव्वल होता था वो खुद से दौड़ने की रेस में, पर जिंदगी ने एक दिन रेस ही बदल दी । लाContinue reading “एलान- ऐ -जंग”
रहमदिल जख्म
कुछ जख्म कभी भरते नहीं,बस छुप जाते है वक्त की चादर तले।उभरने के लिए यादो की आँधियो में,जो थमती नहीं सांस रुके बिना। कभी याद आ जाती है चिलचिलाती धुपबरगद की छाँव में जहा कदम ठहर जाते थे।कभी गरजते बादल और घनघोर बारिश,जो रोक देती थी घर के बाहर निकलने से। अजीब था वो जाडोContinue reading “रहमदिल जख्म”
तेरे खत – एक अलग अंदाज
तेरी खशबू में बसे खत मै जला भी देता,पर दिल में लगी आग बुझाता कैसे ?गंगा में भला क्यों तेरे खत मै बहातामेरे अश्को का दरिया क्या कम था ? जज्बात है ये खत, कोई सामान नहीं,अश्को की बारिश से ताज़ा रखा है उन्हें।और हा, हर अश्क लहू से सिचा है मैंने,मैले न हो जायेContinue reading “तेरे खत – एक अलग अंदाज”
नशा हवा का
अजीब नशा होता है हवा का,शराब तो फिर भी सुबह उतर जाती है।मिटा देते है दोनों ही फर्क होने और न होने में,पर हवा तो बिन पिए ही चढ़ जाती है।आसान होती है सवारी हवा की,मुश्किल तो होता है गाड़े रखना पैरों को।कौन मुकम्मल हुआ है हवा के सैलाब मे,आना तो हर किसी को जमींContinue reading “नशा हवा का”
नशा
हर कोई नशे में चूर है यहाँकिसी को खुद जमीं से जन्नत देखनी हैतो किसी को बेदखल करना है औरो को जमीं सेएक सूंघ कर करता है नशा,दूसरे का नशा झलकता है रफ़्तार में।दर्शक भी चूर है यहाँ एक अजीब से नशे में‘गैरो’ से नफरत बिना वे खुद से मुहब्बत नहीं कर पातेइसीलिए तो उन्हेंContinue reading “नशा”
कसक
ऐ कसक, कायल हु मै तेरी वफ़ा का,एक तू ही है जो साथ नहीं छोड़ती कभी।कद से नापकर उचाई जिन्हे कल बौना बुलाते थे,पैमानों के बदलते ही वो आज ऊंचे नज़र आते है। कल जिन्हे टाल देते थे बच्चा कहकर,आज जब है चर्चा उन्ही की उम्र के ठहराव की।साइकिल से लेकर हवाई जहाज तक,एक कसकContinue reading “कसक”