आप का जो जी चाहे बन जाइये,पर मेहेरबानी करके हमें मत लड़ाइये।आप और हम तो कल चले जायेंगे,पर इस आग में हमारे बच्चे झुलस जायेंगे । आग लगाने वाले हमेशा खाक हो जाते है,बुझाने वाले ही हमेशा याद रखे जाते है।इतिहास गवाह है, इतिहास बदले नहीं बनाये जाते है,मारने वाले नहीं, बचाने वाले ही नायकContinue reading “नायक”
Author Archives: Vasant V. Bang
सपना
सो जाऊँ कभी तुम्हारी ज़ुल्फो में तो मत उठाना, मेरे बालों को भले ही तुम मत सहलाना । हा तुम अगर थक जाओ तो जरूर उठ जाना, पर मुझे मीठी नींद से मत जगाना। क्या करू बरसो से सोया जो नहीं, दुनिया के डर से कभी रोया भी नहीं। ढूंढता हू तुम्हे तो सब पागलContinue reading “सपना”
ज़िंदा या मुर्दा?
धर्म, जात, पंथ के नाम पर उन्होंने बाट दिया समाज को, कल बाट देंगे फिर वो इंसान के जिस्म और जान को। यदि लड़ जाएंगे अंग एक दूसरे से, क्या हम जी पाएंगे सुकून से? यदि सर को ह्रदय से ऊपर मानेंगे, तो फिर हम दुसरो का दर्द कैसे जानेंगे? हाथ कमाते है तो कंधोContinue reading “ज़िंदा या मुर्दा?”
दिल
दिल भी अजीब है, जरा ज्यादा ही दुखता है, प्यार को क्यों अपनी अमानत समझने लगता है। किसी ने कभी कर लिया हो प्यार का इजहार, कैसे हो गया उस पर जिंदगी भर का उधार? इतनी सी बात भला ये क्यों नहीं समझ पाता, प्यार भी करता है और कसक भी है जताता। ऐ पागलContinue reading “दिल”
मेरे सर, उसके पैर
उससे मुझे मुहब्बत हो जाये इसलिए,उसने मुझे अपने आप से नफरत करना सिखलाया।अरे कितना छोटा है तू बोला वो मुझसे,आ मेरे पास, तेरा कद मै खिंच दूंगा। खुश होकर मै जैसे ही उसके पास पहुंचा,उसने धर दिए अपने पैर मेरे सर पर।उंचाई पर पहुंचते ही फिर शुरू की उसने नयी खोज,उनकी जो तैयार हो खुदContinue reading “मेरे सर, उसके पैर”
मनाऊ जश्न या हो जाऊ शर्मसार?
दे दिया मैंने उसे सब कुछ ये सोच कर, कि वो मुझसे बेपनाह प्यार करता है। प्यार तो उसे सिर्फ अपने आप से था, दुसरो का तो वो सिर्फ कारोबार करता था। पर क्यों नहीं समझ पाया मै उस वक्त? शायद आँखों में मेरे उसने लहू भर दिया था। जिसे भी देखता सिर्फ काफिर हीContinue reading “मनाऊ जश्न या हो जाऊ शर्मसार?”
अरे आईने
कई बार रिश्वत देकर देखी आईने को,हर बार सिर्फ नाकामी ही नज़र आयी।ऐसा भी क्या मांगा मैने,कुछ दाग ही तो छुपाने की मिन्नत की थी। अरे आईने कुछ सिख मेरी माँ से,कितने जख्म छुपाती है मुझसे।कभी नहीं कहती मै मिलने नहीं आया,ज़माने को मेरी व्यस्तता की दुहाई जो देती है। बहन भी नाज करती हैContinue reading “अरे आईने”
ऐ मालिक
ऐ मालिक सब कहते है बहोत मज़बूत हु मै , सही है जब लड़ाई मेरी खुद की होती है। वरना दर्शक दीर्घा में बैठ कर लड़ाई देखना, मजबूती नहीं मज़बूरी होती है। अपनी माँ का सच्चा लाल नहीं मै, अगर रण छोड़ भाग जाऊ कभी। पर बुजदिलो से कोई कैसे लडे, नकाब पहने जो वोContinue reading “ऐ मालिक”
वजूद
मुहब्बत किसी और से नहीं खुद से ही होती है, क्यों की वो कराती है अहसास खुद के वज़ूद का। किसी और का होना तो बस एक बहाना होता है , ज़माने की नज़र में एक पैमाना होता है। इसीलिए मुहब्बत करने से पहले एक बात याद रखना, दिल कभी टूटते नहीं, वजूद टूट जातेContinue reading “वजूद”
उपरवालो को नीचेवालो का सहारा
जब से मेरे मरने का पता चला था,मेरे घर आने वालो का ताता लगा था।कोई रो रहा था, कुछ कोशिश कर रहे थे ,परन्तु चिंता के भाव सबके मुँह पर झलक रहे थे। चिंता नहीं थी किसी को मेरे परिवार की ,चिंता तो थी मेरे अंतिम संस्कार की।लाश को जलाये या दफनाए विषय गहन था,मैContinue reading “उपरवालो को नीचेवालो का सहारा”