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Author Archives: Vasant V. Bang
मै खुदा नहीं
किसी और से क्या लड़ना,अभी खुद से जंग जो बाकी है।किसी के आंसुओ का मोहताज नहीं मैये खज़ाना तो मेरे पास भी है। पर इतना बड़ा भी दिल नहीं है मेराकि बाटता फिरू दर्द ज़माने से।हा कोई अगर चाहे तो दे दो मुझे,मेरे सर आँखों पर थोड़ी जगह खाली है। किसी को रुलाना फितरत नहींContinue reading “मै खुदा नहीं”
वारिस
सरदार ने बनाया था भारत सभी को जोड़कर,कैसे ले सकते है उनका नाम हम दिलो को तोड़कर?आझाद हिन्द पर जो जान न्योछावर करते थे,वो नेताजी क्या किसी और की गुलामी सह सकते थे? बहरो को सुनाने के लिए जो बम के धमाके किया करते थे,तारीख पर तारीख क्या वो शहीद ऐ आज़म सह सकते थे?जातीContinue reading “वारिस”
झूठा सुकून
आज मेरे घर पर भीड़ चढ़ आयी,ये ‘उनकी’ नहीं, अपनों की भीड़ थी।मैंने ही तो गाए थे कभी इनके गुणगान,ना कहता था मै ये ही बचाएंगे हमें ‘उनसे’? फिर भला क्यों ये घुसना चाहते है मेरे घर में?अब ये किसे अपनी जगह दिखाना चाहते है?किसको खतरा देखते है मेरे बेटो से?या इन्हे एतराज है मेरीContinue reading “झूठा सुकून”
अपने पराये
परायो को पहचानना तो आपने सीखा दिया,अब अपना कौन है ये भी समझा देते।मज़हब से तो वो अपने लगते है,पर जात अलग होने की दुहाई देते है।खुश हुए जब हम अपनी जात वालो से मिलकर,तोड़ दिया दिल उन्होंने आमदनी पूछ कर।हमारी त्वचा का रंग भी कुछ को नहीं भाया था,त्वचा का ही नहीं हमारी कालरContinue reading “अपने पराये”
उल्टी चाल
ऐ मालिक बस एक मेहेर कर दे,वक्त के पहिये को घुमा दे थोड़ा पीछे।कुछ है ऐसा जिसे फिर जीना चाहता हु,और कुछ ऐसा जिसे चाहता हु थोड़ा बदलना। लौटा दे मुझे वो हर रात सुबह का इंतजार करने के लिए,वो हर दिन जब होती थी आस किसी का दीदार करने की।दोस्तो की महफ़िल फिर जमेगीContinue reading “उल्टी चाल”
नायक
आप का जो जी चाहे बन जाइये,पर मेहेरबानी करके हमें मत लड़ाइये।आप और हम तो कल चले जायेंगे,पर इस आग में हमारे बच्चे झुलस जायेंगे । आग लगाने वाले हमेशा खाक हो जाते है,बुझाने वाले ही हमेशा याद रखे जाते है।इतिहास गवाह है, इतिहास बदले नहीं बनाये जाते है,मारने वाले नहीं, बचाने वाले ही नायकContinue reading “नायक”
सपना
सो जाऊँ कभी तुम्हारी ज़ुल्फो में तो मत उठाना, मेरे बालों को भले ही तुम मत सहलाना । हा तुम अगर थक जाओ तो जरूर उठ जाना, पर मुझे मीठी नींद से मत जगाना। क्या करू बरसो से सोया जो नहीं, दुनिया के डर से कभी रोया भी नहीं। ढूंढता हू तुम्हे तो सब पागलContinue reading “सपना”
ज़िंदा या मुर्दा?
धर्म, जात, पंथ के नाम पर उन्होंने बाट दिया समाज को, कल बाट देंगे फिर वो इंसान के जिस्म और जान को। यदि लड़ जाएंगे अंग एक दूसरे से, क्या हम जी पाएंगे सुकून से? यदि सर को ह्रदय से ऊपर मानेंगे, तो फिर हम दुसरो का दर्द कैसे जानेंगे? हाथ कमाते है तो कंधोContinue reading “ज़िंदा या मुर्दा?”
दिल
दिल भी अजीब है, जरा ज्यादा ही दुखता है, प्यार को क्यों अपनी अमानत समझने लगता है। किसी ने कभी कर लिया हो प्यार का इजहार, कैसे हो गया उस पर जिंदगी भर का उधार? इतनी सी बात भला ये क्यों नहीं समझ पाता, प्यार भी करता है और कसक भी है जताता। ऐ पागलContinue reading “दिल”