
हर कोई नशे में चूर है यहाँ
किसी को खुद जमीं से जन्नत देखनी है
तो किसी को बेदखल करना है औरो को जमीं से
एक सूंघ कर करता है नशा,
दूसरे का नशा झलकता है रफ़्तार में।
दर्शक भी चूर है यहाँ एक अजीब से नशे में
‘गैरो’ से नफरत बिना वे खुद से मुहब्बत नहीं कर पाते
इसीलिए तो उन्हें ‘खान’ और ‘मिश्रा’ अलग नज़र आते।
Great share
LikeLike
Superb
LikeLike