
आदमी के लाश बन जाने पर रोष नहीं,
लाशो की खबर बन जाने पर एतराज है।
ये कैसा दौर है जनाब, ये कैसे लोग है?
शायद क़त्ल की तरफदारी एक नया रोग है।
कोरोना का क्या कल वो चला जायेगा,
जलती चिताओ का दौर भी थम जायेगा।
पर इस नए रोग से हमारा जमीर मर जायेगा,
बिना इंसानियत का इंसान कैसे जिन्दा रह पायेगा?
Wow
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