
कुछ लाख इंसान क्या मार दिए
ये कोरोना अपने आप को सर्व शक्तिमान समझने लगा।
इंसानो की मौत पर रोने वाले बुज़दिल नहीं हम,
दम है तो हमारी वहशियत को ख़त्म करके बता।
है हिम्मत तो बता छीनकर हमसे हमारी साम्प्रदायिकता,
अरे कोरोना तू नहीं बदल सकता हमारी मानसिकता।
शमशान और कब्रिस्तान पर तो हम अपने महल बनाते है,
हम वो है जो चिताओ के बिच बैठ कर उत्सव मनाते है।
तुझे क्या लगता है तेरे डर से हम अस्पताल बनाएंगे,
बाबाओ को छोड़ हम क्या विज्ञानं को अपनाएंगे?
इतना गुमान न कर कोरोना बस ये दौर गुजर जाने दे,
बहोत जल्द ही हम अपनी असलियत फिर तुझे बताएंगे ।
आज की तीव्र समस्याओं की व्यापकता दर्शानेवाला तीक्ष्ण व्यंग !!
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बहुत खूब सर।
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