
मुहब्बत किसी और से नहीं खुद से ही होती है,
क्यों की वो कराती है अहसास खुद के वज़ूद का।
किसी और का होना तो बस एक बहाना होता है ,
ज़माने की नज़र में एक पैमाना होता है।
इसीलिए मुहब्बत करने से पहले एक बात याद रखना,
दिल कभी टूटते नहीं, वजूद टूट जाते है।
और फिर दिल तोड़ने को क़त्ल भी नहीं माना जाता,
धड़कनो को, जिन्दा रहने की निशानी जो समझते है।
पर खुद अपनी लाश का बोझ उठाना आसान नहीं होता,
इसीलिए आशिक अक्सर मयखानो में पाए जाते है।
यारो पिने वालो को कभी बदनाम मत करो,
वो तो बस रोज थोड़ा थोड़ा अपने आप को जलाते है।
Beautiful expression. Love this poem. Thank you
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Thanks Sushil.
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