उपरवालो को नीचेवालो का सहारा

जब से मेरे मरने का पता चला था,
मेरे घर आने वालो का ताता लगा था।
कोई रो रहा था, कुछ कोशिश कर रहे थे ,
परन्तु चिंता के भाव सबके मुँह पर झलक रहे थे।

चिंता नहीं थी  किसी को मेरे परिवार की ,
चिंता तो थी मेरे  अंतिम संस्कार की।
लाश को जलाये या दफनाए विषय गहन था,
मै हिन्दू हु या मुस्लिम इस पर चल रहा मंथन था।

तभी एक आवाज़ आयी,
आज दंगे रहने दो भाई।
शमशान और कब्रिस्तान में आज जगह नहीं है ,
एक ही लाश आज के लिए सही है।

सभी धरमो के रक्षको ने बड़ी मुश्किल से भावनाओ पर काबू किया,
लाश को आधा जलाने और आधा दफ़नाने का फैसला किया।
इतनी जद्दो जहद के बाद जब ऊपर पहुंचा,
किसे क्या रिश्वत दू ये सवाल मन में कोहन्दा।

सोचा मिले येशु तो बताऊंगा  कितनो को मैंने क्रिश्चन बनाया,
भगवान को तो बता दूंगा कितनो को घर वापस लाया।
खुदा को जिहाद का वास्ता दूंगा,
नानक, बुद्ध , महावीर को भी किसी तरह खुश कर लूंगा।

पर ऊपर के हालत देखकर मेरा सर चकराया ,
ईश्वर, अल्लाह, येशु की जगह मुझे एक बहुरुपिया नज़र आया,
इनके पास रहने  अलग अलग घर नहीं सोचकर मुझे तरस आया,
आखिर इनके हालत बदलने का मैंने बीड़ा उठाया।

मैंने निचे धर्म रक्षको को फ़ोन लगाया,
उपरवालो के हालात का जायजा करवाया।
अब निचे इंसानो की मीटिंगे चल रही है ,
ऊपर वालो के हालात सुधारने की योजनाए बन रही है।

सेठो ने कहा है उपरवालो के लिए धन के भंडार खोल देंगे,
जरुरत पड़ने पर कस्टम, एक्साइज इनकम टैक्स वालो की भी मदत लेंगे।
नया घर बनाने के लिए तोड़फोड़ का जिम्मा युवा लेंगे,
उपरवालो पर हो रहे अन्याय का व्हट्सप्प पर प्रचार भी करेंगे।

उपरवालो को मैंने समझाया , अब तुम आश्वस्त हो जाओ,
बहुरुपियापन छोड़ अलग अलग रूप में आ जाओ।
साक्षात् इंसान जो अब तुम्हारी मदत करेंगे ,
जल्द ही आप सब अलग अलग घरो में रहेंगे।

आपके घरो पर अब इंसान पहरा देंगे,
आपकी भावनाओ की जिम्मेदारी हम लेंगे।
इस पुण्य कर्म के लिए मै फिर निचे जाऊंगा,
भड़का कर दंगे और कईओ को अपने साथ ऊपर ले आऊंगा।

Published by Vasant V. Bang

I am a human being with all shades and imperfections. A management educator and advisor by profession I realized pretty late in life that my true calling is expression of human feelings, and hence this blog.

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