बचपन की वो गलिया आज भी वही है, बस हम लोग दूर और कही है। हा कुछ रास्ते जरूर हो गए है चौड़े, अब वो मैदान भी नहीं जहा थे हम कभी दौड़े। कुछ इमारते ज़रूर ढह गयी है, चार आने की गोली वाली दुकान भी अब नहीं है। वो चौराहा भी कुछ बदला बदलाContinue reading “वो गलिया”
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बक्श दो यमराज
खुले नहीं है मंदिर, न ही मस्जिदे खुली है, बंद है गिरिजे, गुरद्वारे भी बंद है । आज जब सबसे ज्यादा जरुरत है हमें , तो क्यों इन सबके हात तंग है। इनके नाम पर मरने मारने पर उतारू रहने वाला इंसान, कैसे आज मान बैठा डॉक्टर को ही अल्ला, गॉड और भगवान। बक्श दोContinue reading “बक्श दो यमराज”
कुछ सवाल अपने आप से
आज हमारे घर में कोई भुखमरी का शिकार नहीं है, क्योंकि खेत खलिहानो में कोई पसीना बहाता है। आज हम नंगे हो तो भी वैसे दिखाई नहीं पड़ते, क्योंकि कोई हमारे लिए कपडे बुनता है। क्या अहसास है हमें की हम जीन घरो में ऐशो आराम से रहते है, उनके लिए सीमेंट की बोरियों उठाईContinue reading “कुछ सवाल अपने आप से”
सालगिरह
वो हमारी सालगिरह पर मुबारकबाद देने नहीं आयी, किसी और की महफ़िल जो आबाद हो रही थी। पर यह हमारा दावा है की गर जनाजा जो हमारा निकला, तो वो पहले हमारी कब्र पर आएगी। हमें दफनाए सिवा वो कही और नहीं जाएगी। यु तो हर सालगिरह पर हमारी जिंदगी से एक साल चला जाताContinue reading “सालगिरह”
पहला प्यार
झूठे है जो कहते है प्यार सिर्फ एक बार होता है, प्यार तो प्यार है कई कई बार होता है। पर यह भी सच है की वो खास होता है, जब किसी को प्यार पहली बार होता है। नासमझ ना भी हो तो पूरी समझ भी होती नहीं, पर उसे कौन अच्छा लगता है यहContinue reading “पहला प्यार”
दौर
जहा आकर रुक गए थे कुछ के दौर, उसी वक्त शुरूवात कर रहे थे कुछ और। जीतनी उम्र थी उनकी, जब उनके दौर ख़त्म हुए, उससे ज्यादा उम्र के तो आज हमारे दौर हो गए। आज जब हम उपरी पायदान पर चढ़ गए, तब भी कहा हमारे दौर बंद हुए। यह कहना हमारा घमंड नहीं,Continue reading “दौर”
मास्क
मास्क पहनने के लिए वायरस को क्यों बदनाम करते हो, बिना मास्क हम जी ही नहीं सकते, कहने से क्यों डरते हो। भीतर के बच्चे को छुपाने के लिए ‘बडे’ हो जाने का मास्क आता है, कोई ज़िन्दगी भर नादान बना रहे ज़माने को कहा सुहाता है। पहले बेटा, फिर पति, फिर बाप वाला मास्कContinue reading “मास्क”
मेरा कसूर !
क्या हम जानते है जो हम आज करेंगे, उसकी कीमत हमारे ही पोते पोती कल भरेंगे। अगर करेंगे हम समर्थन दंगाइयों का लेकर ‘धर्म’ का नाम, कल वे ही बुलाएँगे हमारे पोते को कहकर है अपने ‘पंथ’ का काम। जब धर्म और पंथ के मुद्दे कमजोर पड जायेंगे, तब कोई नेताजी ‘जाती’ का झंडा लहरायेंगे।Continue reading “मेरा कसूर !”
गुब्बारा
हर आदमी है केवल एक गुब्बारा, जो जब दिखे ऊँचा लगे सबको प्यारा। गुब्बारे की ऊंचाई नापना गलत नहीं, पर गुब्बारे में हवा किसने भरी उससे लगता है अंदाज़ सही। उधार के फेफड़े गुब्बारो को जल्दी ज़रूर उड़ाते है, पर सूद ना चुकाने पर उतनी ही तेज़ी से ज़मीं पर भी लाते है। पर फेफड़ोContinue reading “गुब्बारा”
चमकना या चमकाना ?
चका चौंध सबकी होती है, सवाल सिर्फ होता है: कैसे और कब। कोई चमकाता है बाप के नाम और दाम से, कोई चमकता है खुद के काम से। जब कुछ इतराते फिरते थे पुश्तैनी दम पर, तक़दीर बनाने का जिम्मा था खुद हम पर। किसी रोज हमारी साईकिल को एक मोटरबाइक ने क्या हरा दिया,Continue reading “चमकना या चमकाना ?”