
सुनकर बलात्कार की वारदातों को,
कभी जन आक्रोश उमड़ पड़ता था ।
क्या वो अनपढ़ो का सैलाब था
जो न पूछता था बलात्कारी का जाती और धर्म।
आज हर कोई ज्ञान से भरा है लबालब,
व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के इस दौर में।
नाम सुन कर तय करने लगे है,
कुछ बोले भी या न बोले ।
आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में
लिखना बोलना तो छोड़िये
क्या महसूस करना है
ये कहा अब लोग खुद तय करते है।