
कहते है मोहब्बत इंसान को अपने वजूद से मिलाती है,
‘मै भी कुछ हु’ इस बात का अहसास कराती है।
भला फिर क्यों इंसान को हैवानियत पसंद आती है?
शायद उसे अपने भीतर की कुंठा डराती है।
इसीलिए कुछ लोग हैवानियत की दुकान लगाते है,
काल्पनिक हैवानो से इंसानो का परिचय करवाते है।
मिलकर काल्पनिक हैवानो से इंसान खुद को बेहतर समझता है,
तब कही जाकर वो अपने आप से मोहब्बत कर सकता है।