
किसी के मिलने से भला किसी के बिछड़ने का दर्द कम होता है?
मान तो लेता है दिल पर न जाने क्यों भूल नहीं पाता।
दर्द के बदले दर्द ये इलाज नहीं मर्ज – ऐ – इश्क़ का,
सच्चा इश्क़ रुलाता जरूर है पर कभी कम नहीं होता।
एक टीस सी उठती है जब भी खयाल आता है उस गुजरे हुए ज़माने का ,
सोचता हु क्या कोई फर्क पड़ता था मेरे होने और न होने का?
ए जिंदगी हर बार जब तू मिलाती है मुझे बीते हुए कल से,
तू शायद भूल जाती है अब मुझे फर्क नहीं पड़ता तेरे होने और न होने का।