
या खुदा अब इंसानो पर थोड़ी कम मेहेर करना,
जिन्दा लाशो की धड़कने मत चालू रखना।
क्यों तू मरने वालो को वापस पैदा करता है,
इंसानो के दिल में क्यों जज्बात भरता है।
मोहब्बत नहीं इंसानो को नफ़रत ही सीखाना,
रहम दिल नहीं तू अब सबको संग-दिल बनाना।
मोहब्बत करने वालो को तू अक्सर रुलाता है,
नफ़रत भरे दिलो की तू ताजपोशी कराता है।