
रास्ते कभी ख़त्म नहीं होते,
हां कुछ खो जाते है, कुछ याद रहते है ।
रास्ते तो बनते ही है बिगड़ने के लिए,
समय के थपेड़े जो झेलते रहते है।
इंसान भी भला कहा एक से रहते है,
टूटते रहते है फिर से जुड़ जाने के लिए ।
बदलाव निशानी है जिन्दा होने की,
ठहराव तो सिर्फ मिटटी के निचे होता है।