
इंसानो को जानवर तो वो हमेशा ही समझते थे,
पर शायद समझने और होने का अंतर परखते थे।
दुनिया भर में एक होड़ सी लगी है इस अंतर को मिटाने की,
इनमे और उनमे अपनों की बलि चढाने की।
नहीं करते वो आपस में बात कभी जिंदगी के अरमानो पर,
पर पूरी सहमति है इनमे और उनमे जित के पैमानों पर।
पैमाना ये है की कौन कितनो को किस हद तक गिरायेगा,
इंसान रहित दुनिया का सरताज वो ही कहलाएगा।