
कुरेदने को यहाँ एक नहीं हज़ार मिलेंगे जख्म,
हर जख्म का अलग अंदाज-ए -बयां होगा।
किसी और के लहू से अगर जो भर जाते जख्म,
वो क्यों आज तक अपने दिलो में नासूर लिए घूमते।
My occasional poetic surge

कुरेदने को यहाँ एक नहीं हज़ार मिलेंगे जख्म,
हर जख्म का अलग अंदाज-ए -बयां होगा।
किसी और के लहू से अगर जो भर जाते जख्म,
वो क्यों आज तक अपने दिलो में नासूर लिए घूमते।