
दिल भी अजीब है, जरा ज्यादा ही दुखता है,
प्यार को क्यों अपनी अमानत समझने लगता है।
किसी ने कभी कर लिया हो प्यार का इजहार,
कैसे हो गया उस पर जिंदगी भर का उधार?
इतनी सी बात भला ये क्यों नहीं समझ पाता,
प्यार भी करता है और कसक भी है जताता।
ऐ पागल दिल यदि तु टुटकर जुड़ नहीं पाता,
तब फिर तु शीशा नहीं, पत्थर कहलाता।