
वो हमारी सालगिरह पर मुबारकबाद देने नहीं आयी,
किसी और की महफ़िल जो आबाद हो रही थी।
पर यह हमारा दावा है की गर जनाजा जो हमारा निकला,
तो वो पहले हमारी कब्र पर आएगी।
हमें दफनाए सिवा वो कही और नहीं जाएगी।
यु तो हर सालगिरह पर हमारी जिंदगी से एक साल चला जाता है,
पर गम कैसा उनसे मिलने का लम्हा तो पास आता है।
यही सोचकर हम साल दर साल अपनी सालगिरह मनाते है,
अब तो हर पल बस खुदा से यही मिन्नत माँगते है,
या खुदा मौत हमें ऐसे वक्त न देना की उनकी महफ़िल में गैरत पड़े,
जीते जी तो उन्हें हमसे गिला रहा, हमारी मौत पर तो उन्हें सुकून मिले।
बहुत ख़ूब।🎉👍
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