दौर

Photo by Shamia Casiano on Pexels.com

जहा आकर रुक गए थे कुछ के दौर,

उसी वक्त शुरूवात कर रहे थे कुछ और।

जीतनी उम्र थी उनकी, जब उनके दौर ख़त्म हुए,

उससे ज्यादा उम्र के तो आज हमारे दौर हो गए।

आज जब हम उपरी पायदान पर चढ़ गए,

तब भी कहा हमारे दौर बंद हुए।  

यह कहना हमारा घमंड नहीं, है यह हमारा मरहम,

लाख दबाये दर्द दिख ही जाता है गहरी जो है जख्म।

किसी का दिल दुखाना यह नहीं हमारा मकसद,

पायदानो की उचाईयो से हमें न तोले बस यही रही हसरत।

आज यह हम किसी और से नहीं अपने आप से बोलते है,

हमारा वजन हम किसी और के नहीं अपने तराजू से तौलते है।

Published by Vasant V. Bang

I am a human being with all shades and imperfections. A management educator and advisor by profession I realized pretty late in life that my true calling is expression of human feelings, and hence this blog.

Leave a comment