हर आदमी है केवल एक गुब्बारा,
जो जब दिखे ऊँचा लगे सबको प्यारा।
गुब्बारे की ऊंचाई नापना गलत नहीं,
पर गुब्बारे में हवा किसने भरी उससे लगता है अंदाज़ सही।
उधार के फेफड़े गुब्बारो को जल्दी ज़रूर उड़ाते है,
पर सूद ना चुकाने पर उतनी ही तेज़ी से ज़मीं पर भी लाते है।
पर फेफड़ो की मालकियत पहचान पाना आसान नहीं होता ,
वरना हर इंसान ऊंचाई और गहराई मे फरक समझता।