अव्यक्त

उनके जाने की खबर सुन कर दिल का कांप जाना,

और ऊनको सामने पाते ही सांसो का तेज तेज चलना।

उँगलियों का थरथराना और होंठो का कंपकपाना,

जुबा का लड़खड़ाना, और शब्दों को भूल जाना।

क्या यह किसी बात का अंदेशा है,

कोई कहता है यह हमारे दिल का छुप्पा संदेसा है.

पर आप है की इसका मतलब नहीं जानती,

या फिर जानकर भी इसे नहीं पहचानती।

पहचानती भी क्यों, आपकी सूरत जो कईंयों को प्यारी है,

हम पर तो आपकी सीरत की खुमारी है.

हां आज यह सब साथ निभाने की कस्मे खाएंगे,

पर बदलते ही तुम्हारी जुल्फों का रंग यह भी बदल जाएंगे।

तब शायद तुम्हे मेरी याद आएगी,

पर उस वक्त तुम्ह मुझे कही और पाओंगी।

लाख पटक लोंगी तुम सर पर मैं नहीं लौटूंगा,

भला मेहबूबा मौत का दमन मै कैसे छोडूंगा।

Published by Vasant V. Bang

I am a human being with all shades and imperfections. A management educator and advisor by profession I realized pretty late in life that my true calling is expression of human feelings, and hence this blog.

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